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पटना छात्र प्रदर्शन पर पुलिस का शिकंजा, 24 एफआईआर दर्ज, 285 नामजद, देर रात छात्रों को भेजा गया बेऊर जेल

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Alam Ki Khabar: नीट पेपर लीक और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 24 एफआईआर दर्ज कर 285 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि हजारों अज्ञात लोगों पर भी मामला दर्ज हुआ है।

पटना, 28 जुलाई। आलम की खबर: नीट पेपर लीक मामले और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना में 22 और 25 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। राजधानी में दर्ज मामलों की जांच के क्रम में बड़ी संख्या में छात्रों और अन्य आरोपितों को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बेऊर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर की जा रही है।

पुलिस के अनुसार छात्र आंदोलन से जुड़े कुल 24 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 285 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है, जबकि लगभग छह हजार अज्ञात लोगों के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान कर रही हैं।

रविवार देर रात बड़ी संख्या में गिरफ्तार छात्रों को पटना के छज्जूबाग स्थित न्यायिक अधिकारी के आवास पर पेश किया गया। सुनवाई पूरी होने के बाद कई छात्रों को न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया। इस दौरान न्यायालय परिसर के बाहर बड़ी संख्या में परिजन अपने बच्चों के बारे में जानकारी पाने के लिए देर रात तक इंतजार करते रहे।

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोपित छात्रों को जमानत देने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। इस दौरान न्यायालय ने मामले से जुड़े कुछ बिंदुओं पर पुलिस अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण मांगा।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों में सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, कई छात्रों और उनके परिजनों ने दावा किया कि उनका आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से कोई हाथ नहीं था। कुछ अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों को अन्य काम से बाहर रहने के दौरान हिरासत में लिया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और पुलिस ने कहा है कि प्रत्येक गिरफ्तारी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है।

गौरतलब है कि छात्र संगठनों ने नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस का आरोप है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया। इसी आधार पर अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पटना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जारी है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

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विशेष टिप्पणी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान या कानून व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप सामने आते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है। वहीं यह भी उतना ही जरूरी है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। पूरे मामले में अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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